Sunday, 27 October 2019

Happy Diwali 2019

दिपक की जगमगाहट आपके पुरे आँगन को उज्जियाये,
रोशन करे ज़िंदगानी और खुशनुमा सा बनाये,
क्योँकि ये पर्व कोई मामूली पर्व नहीं, है पर्व पुरुषार्थ का,
जगमग-जगमग दीपों से रूहानी झलकते दिव्यार्थ का |

देहरी का दीप हराते रहे सदा अंधियारे की घोर-कालिमा,
विजयी सदा रहे जगमग उज्जियारे की स्वर्ण-लालिमा,
दीपों से सीखें सभी समर्पण, रोशन, सामाजिक और मोहब्बत जैसे गुणों को,
क्योँकि वही तीर्थ है,
दीपावली मनाये समझ उसका सही अर्थ,
वरना फिर व्यर्थ है |

पावनता इस पर्व की, धर्म की अधर्म पे विजय की,
खुशियाली के आगमन की, पटाखों  बाजन की,
खुशियों को लुटाने की बजाये हम संजोय बैठे हैं ,
पहले मिला करते थे सब से मिठाइयां लेकर, आजकल केवल व्हाट्सप्प किये बैठे हैं  |

आज भी वो बीता दौर, मुझे याद आता है,
दोस्तों की अंजुमन में पटाखों संग अपना कहर मचाना, मुझे  याद आता है,
प्रेमिका को दीपों की संज्ञा से नवाजना, मुझे याद आता है,
प्रेमिका का हमारी उपमाओं पे फ़िदा होना और दोस्तों का हमसे जलना, मुझे याद आता है |

मोहब्बत की आपकी मधुर छाँव बस सदा के लिए हमे दे दीजिये,
आज तहे-दिल से हमारी तरफ से दीपावली की शुभकामनायें कबूल कर लीजिये,
अपने आशीष की रवानगी सदा नाचीजों पे यूँही बरसाइये,
आज के सुभ अवसर पर इस नाचीज़ की तरफ से दीपावली की शुभकामनाएं स्वीकार फरमाइए | 

Saturday, 19 October 2019

Wo Ek Raat

वो एक रात भी क्या रात थी,
जब सिर्फ अपनी धड़कने ही मेरे साथ थी,
प्रश्न ज़िन्दगी का या ज़िन्दगी से अलविदा लेने का मुक़र्रर था,
जज्बा था अपनी सासों को चलाने और मौत से इंकार-ए-मंजर था |

समय को बदलता और बिगड़ता था मैं देख रहा,
हालत पे अपनी डॉक्टर्स को भर सक प्रयास करता था देख रहा,
आज सवाल इंसानी ज़िन्दगी को यम से बचाने का था,
मच्छर बड़े नहीं हुए अभी इंसान से यही दम ख़म दिखाने का था |

चिकित्सा विज्ञान की भाषा में मच्छर का कटा डेंगू कहलाता है,
लिवर को कर वायरस संक्रमित हेपेटाइटिस का शिकार बनाता है,
प्लेटलेट्स करता है कम, बुखार, उलटी, जोड़ो में दर्द से अपनी पहचान बताता है,
अच्छे खासे खेलते इंसान को बीमार कर अस्पताल पहुंचाता है |

ऊं तो हड्डी तोड़ बुख़ार की कोई दवा नहीं,
ये जंग हर शरीर को खुद को मजबूत बना ही है लड़नी,
ढेर सारा पानी और आराम का सहारा लेकर,
सुबह से शाम खुद की तंदुरुस्ती की चाह है रखनी  |

उस रात मैंने भी अपनी ज़िन्दगी को साथ छोड़ते देखा था,
बिगड़ती हालत  पे डॉक्टर्स को विचलित होते देखा था,
सब की नज़र ICU इंस्ट्रूमेंट्स के बदलते रीडिंग्स पे एकाग्र थी,
ब्लड रिपोर्ट थी जो गिरते प्लेटलेट्स की साक्षत्कार थी |

डॉक्टर्स की जुबानी कहूं तो आज की रात सरीर साथ दे जाये,
तो ये सक्श बच कल  की सुबह देख पायेगा,
वरना इस कम उम्र में हम सब को के कह अलविदा,
हमारे अस्पताल पे एक काला दाग छोड़ जायेगा |

सुधे को साध ना सकता है,
होनी को कोई टाल ना सकता है,
प्लेटलेट्स मिला नहीं कहीं,
अब अपरिवर्तनवादी दवा और दुआ ही इस सक्श को बचा सकता है |

चालू हुआ संगर्ष डॉक्टर्स ने अपनी अपरिवर्तनवादिता की गुहाई दी,
हमने अपनों को  कर याद ईश्वर से अपने बचे कर्मों को पूरा न कर पाने की दुहाई दी,
कहते है मन में कुछ करने की और दूसरों के लिए जीने का हुनर जिनके पास है,
मौत भले ले कुछ पलों के लिए उन्हें अपनी गोद में सुला, मगर अपने साथ ले जाने से करती इंकार है |

कुछ हमारे हौसले और अपनों के प्यार ने,
ईश्वर के दूजे रूप डॉक्टर्स के अचूक प्रयास ने,
ईश्वर की हुई अनुकम्पा और मिली हमे जीने की आस,
हमारे बीमार सरीर ने पकड़ मजबूती,  की जीने की एक और प्रयास |

हालत सुधरी तो सबको हमने हस्ता पाया,
जो सुबह सायद नहीं थी मुकर्रर, उसे भी हमने उगता पाया,
उस सुबह के बाद आज तक कई और सुबह को किया हमने प्रणाम,
सच कहूं तो आज भी मैं उस रात को भुला नहीं पाया |

मेरी एक मौत ने कई ज़िन्दगियों को तबाही का मंज़र था दिखाया,
सोचता हूं ये बीमारी तो पुरे देश को कर रही तबाह और हममें से कोई क्योँ कुछ न कर पाया,
वक़्त की गुहार है हम जागरूक होकर अपने समाज और देश को इस बीमारी से बचाएं,
जमा पानी के स्रोतों को कर साफ़, आओ मिलकर अनेकों ज़िंदगियाँ बचाएं | 

Saturday, 21 October 2017

Kalpana Ko Apni Aakaar Kaise Duin

कस्तियाँ समुंदर में सफ़र, अपना तय तो कर जाती हैं ,
कुछ मुसाफिरों को किनारा, तो कुछ को अंजानो से मिला जाती हैं ,
पर सफ़र के इस दौर में दिखा हर वो चेहरा, क्या याद रह जाता है ,
कइयों को अपना और कइयों के अपने तो हम बन जाते हैं ,
पर कोई एक चेहरा जो अपनेपन की दिला दे याद,
वो क्या हर मुसाफिर के मुकाम में आता है ?

उसका दीदार हो जाये बस इसी बात की कल्पना किया करते थे ,
आज ये आलम है की कल्पनाओ में भी उसका दीदार ही किया करते हैं ,
जो देख लूं उसे हो जायेंगे मेरे नैन तृप्त , इस बात पे विश्वास कैसे करुं ,
सवाल तो वही है आज तलाक जहाँ में, की कल्पना को अपनी आकार कैसे दूं |

ग़ौरतलब फरमाए ज़माना की दिल के मेल से बड़ी कोई मालकियत नहीं ,
दिल-ए -आरज़ू हो अगर पाने की निःस्वार्थ साथ , तो क़ायनात करे कोई हिमाक़त ऐसी गुंजाईश नहीं ,
कई बार पाने की परिभाषा समझते समझते हम किसी को गवां बैठते हैं ,
और कई दफा मिले हुए राही को ही तलाशते पूरी ज़िन्दगी निकाल देते हैं | 

गुलाबों की हिफ़ाज़त हमने माली और भवरों दोनों को करते देखा है,
दोनों के जहन में अलग अलग मोहब्बत को महसूस करते हमने देखा है,
माली जहां जल्द से जल्द उस गुलाब को खुद से अलग करने की फिराक में रहता है,
वही भवरा खुद को गुलाब के भीतर समाने की ज़िद्द लिए बैठा है ,
मोहब्बत दोनों की देख - गुलाब भी खुद से यही पूछे की किसकी मोहब्बत पे विश्वास करुं ,
मेरी तरह गुलाब भी यही पूछे सवाल , की कल्पना को अपनी आकार कैसे दूं |


एक गुलाब हमे भी हुआ नसीब तो सोचा माली बनूं या भवरा ,
स्वार्थ के लिए कर दूँ खुद से जुदा या स्वार्थ के लिए समां जाऊं उसमें पूरा ,
कल्पना की तो निस्वार्थ काटें बनना ही गवारा हुआ ,
खुदी को भुला की रखवाली, तो कुछ तो गुलाब का साथ नसीब हुआ |


खुद को भुला अगर की हो किसी की सच्चे दिल से हिफाज़त ,
तो भले हो वो कांटा पर गुलाब के संग रहने की मिलती उसी को है इज़्ज़ाज़त ,
गुलाब के दिल की बात अक्सर काटें ही समझा करते हैं ,
गुलाब दिल-ऐ-बयान करने के लिए किसी माली या भौरों को नहीं बुलाता |

काटों के आकार की कल्पना किसी ने कल्पना में भी ना की होगी,
काटों की चुभन की मिठास को समझने की गुफ़तगू किसी ने ना की होगी,
कल्पना तो है की समझूं काटों के निस्वार्थ आकार को,
पर सवाल तो आज भी वही है , की कल्पना को अपनी आकार कैसे दूं | 

Sunday, 11 June 2017

Kuch Bhulne Kuch Bhulane Ki Khushi

कशिश थी ज़माने की दूरिऑन मुझे हिरासत में मिली,
सोचा बहुत की क्या थी गलती जो तन्हाईयाँ मुझे ही मिली,
कई बार किसी की इन्तेहाँ चाहत दूरियां बढ़ा जाती हैं,
कोशिश थी मिलन की मगर ये किस्मत दूरियां दे जाती हैं |


गम इस बात का नहीं की तन्हाई को मैंने है महसूस किया,
मोहब्बत ही की इतनी की हर पल उसे याद किया,
जरुरत उसकी भी ना पड़ी क्योँकि मोहब्बत मेरी निस्वार्थ थी,
जब तक थी उसकी ख़ुशी तब तक ही वो मेरे साथ थी |


पलों को जीने की वकालत तो सभी किया करते हैं,
हर पल लेता है अपना इन्तेहाँ ये कोई भी नहीं कहते हैं,
दिल हो साफ़ और नियत में अगर झलक जाये दीवानगी,
तो ऐसी कोई मंजिल नहीं जो हो न सके हासिल कभी |


खुद की तन्हाई से लड़ के मई हंस तो रहा था,
अपने ग़मों को छुपा के मैं दुनिया को हंसा तो रहा था,
पर वही कम्भख्त पल फिर से इतिहास दोहरा गए,
जो मुझे भुला बैठे थे कम्भख्त उससे वापस भेंट और उसकी याद दिला गए |


दिल को अभी मैंने अपने समझाया ही था,
तमन्ना पाने में अभी देर है ये समझाया ही था,
मगर ये पल का इम्तेहान फिर एक बार इम्तेहान ले गया,
जिसे कर रहा था याद कर भुलाने की कोशिश, उसकी याद फिर से दिला गया |


दुनिया किस मोड़ पे किस से करा जाये मुलाक़ात ये कहना नामुमकिन है,
कभी मिले अनजान तो कभी हमसफ़र मगर सही तरीके से पहचानना मुश्किल है,
क्योँ किसी की याद उसकी मौजूदगी जाता जाती है,
सायद ये उसे पाने की है चाहत जो उसके ठुकरा देने के बाद भी उसकी याद दिला जाती है |


अपनी मंजिल को कभी ना दुनिया के प्रहार से भूलने देना,
अगर ले ये मंजिल परीक्षा तो मुस्कुरा के उसको अपने लड़ने की ताकत की चेतना देना,
कभी भी किसी के चाहने से किसी की हार नहीं होती,
हालातों से अगर खुद मान ली इंसान ने हार तो सब कुछ पा लेने के बाद भी मन की जीत नहीं होती |

Monday, 15 August 2016

Happy Independence Day 2016

देस की स्वतत्रंता को आओ हम अपने उड़ान की परिकाष्ठा बनाये,
जो देख नहीं पाई दुनिया हम से आओ वो आज दुनिया को दिखाएँ,
स्वतत्रंता दिवस के इस पावन दिवस पे आओ अपने विचारों की स्वतत्रंता को सुद्रुढ बनाये,
पुरे विश्व में अपने भारतवर्ष की तररक्की का परचम फैलाएं ।

देश को प्रगति की राह अब हर देशवासी को दिखानी होगी,
अलग अलग हो भले प्रयास पर हर प्रयास को अपनी सम्पूर्णता दिलानी होगी,
हर दिल में बस रहे अपने देश को विश्वप्रियता दिलानी होगी,
मेरा देश से हमारे देश की संज्ञा भारतवर्ष को दिलानी होगी ।

क्योँ न करें आगाज-ए-ऐलान आज ताकि हो सके हर कोने कोने में स्त्री का सम्मान,
क्योँ न ख़त्म करें नफरत ताकि मुश्किल हो पहचानना कौन है हिन्दू और कौन मुसलमान,
क्यों न भ्रस्टाचार को ओढ़ाएं हम ईमानदारी की चादर,
इंसान करे इंसान का सम्मान और छोटे बड़े सबका हो आदर ।

मुक्कमल है ईमान तभी तो हर हिंदुस्तानी रखता है वतन पे ईमान,
देश की हो बात तो हर हिंदुस्तानी रखता है हथेली पे जान,
पर आज देश के लिए मरने से ज्यादा जीने की जरुरत है आन पड़ी,
खड़ा है ससक्त भारत ध्यान रहे दुश्मनो और आतंकवादियों,
तुम्हे हर बार की तरह मुह की है खानी पड़ी ।

आपसी भाईचारे और अपनेपन को तवज्जु और हमे दिलानी होगी,
अपने फायदे से पहले देश को प्राथमिकता हमे अपने दिलों में लानी होगी,
जिस तिरंगे को कफ़न बना गौरवान्वित कर गए वो पवित्र दिलेर,
उन दिलेरों की कुर्बानी को सदा अपने दिलों में सम्मान दिलानी होगी ।

तिरंगे की शान का नशा हर दिल पे छाये रहे,
भारत माँ की रक्षा के लिए जान देने का गुरूर हर दिल में के छाये रहे,
हिंदुस्तान का परचम हर देशवासी ऊन्ही लहराते रहे,
विश्व स्तर पे हिंदुस्तान का नशा हर दिल पे छाये रहे । 

Sunday, 1 May 2016

Majdoor

जो मजूरी के लिए दूर दूर तक भटके वही मजदूर है कहलाता,
जो अपनी मेहनत और लगन से जीवन चलाये वही मजदूर है कहलाता,
जो अपने  सपनों को दिल में संजोए अग्रसर है वही मजदूर है कहलाता,
जो  परिश्रम और करम की मिसाल बना वही मजदूर है कहलाता ।

भरा है ये समाज मजदूरों के वजूद से,
महज स्तर अलग है मजदूरी करने के तरीके से,
हर कोई यहाँ मजदूरी ही तो कर रहा,
गरीब आमिर बनना चाह रहा और आमिर और आमिर बनना चाह रहा ।

हर कोई यहाँ भाग रहा अपने  सपनों को तररकी के साँचे में पिरोने में,
तररकी की ख़ुशी को महसूस कर खुद को सबसे अलग दिखाने में,
हर कोई यहाँ सबसे ऊंचाई की शिखर को पाने के लिए है जी रहा,
अपनों को और खुद को भुला, खुद को झोंके जा रहा ।

देश  की प्रगति भी इन्ही मजदूरों के करम से निर्धारित होगी,
मजदूर का स्तर कोई भी हो पर परिश्रम और लगन अपनी परिकाष्ठा पे होगी,
देश खड़ा है अनगिनत मजदूरों के करम के निर्धारित परिणामों से,
मजदूरों ने भी सींचा है देश को अपनी मेहनत के पसीने से ।

मजदूर की ख़ुशी उसके परिश्रम से निर्धारित है होती,
मजदूर की इज़्ज़त उसके करम से प्रफुल्लित है होती,
मजदूर लगा है खुद के साथ देश को एक स्वाभिमान दिलाने में,
खुदी हो खुदमे तो झुकती है दुनिया ये सारे जहाँ को दिखाने में ।

आओ आज मिलकर हम समाज के शिल्पकारों को करें नमन,
खुद बने मजदूर और सिद्धांतों में हो हमारे परिश्रम और लगन,
देश की प्रगति में एक अनोखी भागीदारी हमारी भी हो,
मजदूरों से म्हणत से खड़े इस देश की प्रज्वलित चर्चा पुरे संसार में हो । 

Dil Le Gayi

समुन्दर को नदियों की संज्ञा चुराते देखा है,
रेगिस्तान को पैरों के निशान को खुद में समाते देखा है,
पर कोई कैसे किसी के दिल को है चुरा सकता,
जीने के लिए जरुरी है दिल, और उसी को खुद से चुराते देखा है । 

उनकी कशिश ने ढाया खुश अजब ही कहर,
हमे उनका बना ले गए दिल हमारा फैलाते हुए मोहब्बत की लहर,
दिल को जीतना किसी का इतना आसान नहीं,
और जीत ले कोई तो समझो उससे जादा तुम्हारे लिए कोई खास नहीं । 

जीवन की डोर बंधी ही है मोहब्बत के संवेदनशील तार से,
जिसे जितना सिचो उतनी मजबूती आती है प्यार से,
खुद और खुदी के लिए हर इंसान यहाँ जीया जा रहा,
अंत में खुद को ही भुला खुद से ही दूर होते जा रहा । 

क्या मायने है जीवन के जीने के ये हम सोच नहीं पाते,
जो अपने है उन्हें हम समझ नहीं पाते,
झोंक देते है खुद को अंजानो को खुश करने की होड़ में,
लापरवाह बनते है उनके लिए जो चूक नहीं रहे हमपे प्यार लुटाने में । 

दिम्माग को दिल से सदा ही उम्दा तववजु दी है ज़माने ने,
दिल में बसे है जो उन्हें भुला लगा है दिमाग तररकी को पाने में,
पर कैसे पहचानू की कौन है जो दिल में वास करती है,
मुझसे मेरा दिल ही चुरा चुकी और मुझे पता भी नहीं लगने देती है । 


दिल लेने वाली सदा निस्वार्थ मोहब्बत की मूरत होगी,
खुद की ख़ुशी को रख परे आपके दिल की खुशी की फ़िक्र में होगी,
आपके लापरवाह रवैये को भी भुला दो दिल नहीं कर रहा एक बार भी उफ़,
वही है मेरे दोस्त तुम्हारी सच्ची मोहब्बत - ये सच है ना समझना इसे कोई ब्लफ । 

Saturday, 30 April 2016

Khubsurat Aankhen

आँखों में मैंने उसकी अपनी छवि को पाया है,
बेचैन हो भले कितनी भी पर अपने लिए उसकी आँखों में नमी को पाया है,
आँखों में मैंने उसकी खुद की मदहोशी को है भापा,
और है उसे है मुझसे मोहब्बत इस बात को है जाना ।

आँखों से बातें करना भी क्या नायाब तरीका है,
जुबान होती है खामोश और सिर्फ आँखों को कहना है,
आँखों से आँखों का मिलन सिर्फ आँख ही है देख पाते,
दिल करता है महसूस और होठ खुद को सिले है पाते ।

आँखों की कशिश मोहब्बत का सच्चा प्रमाण है,
दिमाग सकता है बदल पर आँख तो दिल का आइना है,
आँखों ने देखि जहाँ समाज की क्रूरता है,
बसा ले किसी को एक बार तो फिर दगा नहीं देती ।

आँखों के भवर को कुछ मैंने भी किया है महसूस,
लुटाई उसकी आँखों ने भी क्या खूब मोहब्बत ना बनते हुए कंजूस,
आँखों के प्याले में भी एक अजब सा नशा है,
जब खुली हो तो दिखा और बंद हो तो छिपा कर करती प्यार हैं ।

आँखों के मजधार में फस्ने का मौका नसीब वालों को है मिलता,
जिनसे मिल जाएँ आँखें उनकी आँखों में बस्ने का मौका उन्ही नहीं मिलता,
अगर हो जाये कोई आँखें आपको बसने के लिए तैयार,
झोक देना सारा प्यार उन आँखों में सदा रहने के लिए मेरे यार ।


Friday, 8 April 2016

Dil Se Kaise Karen Baat

इंसान ने मोहब्बत के कई रूप दिखाए हैं,
कहीं दिल्लगी तो कहीं क़ुरबानी के नग्मे सजाए हैं,
फिर इस मोहब्बत के होते क्योँ किसी का दिल है छूट जाता,
भरी महफ़िल में भी अकेलेपन को महसूस करते टूट है जाता ।

सवाल-ए-दिल मेरा कर गया मुझसे एक तूफानी गुफ्तगू,
पूछ गया क्योँ किसी ने ना सोची उस टूटे दिल की आरजू,
आज नाम आँखों से हर टूटे दिल को खुश करने की गुहार है,
आओ मिल करें दिल से दिल की बातें चला कुछ ऐसा बहार है ।

दिल की मलकीयत किसी की गुलाम नहीं होती,
और दिल में जबरदस्ती घुसने की किसी की औकात नहीं होती,
दिल को समझ कर ही उसके लिए जिया है जा सकता,
और जीते हुए उसके लिए ही उसमे अपना वजूद है बनाया जा सकता ।

लकिन ज़िन्दगी जीना कोई मज़ाक नहीं,
किसी और की ख़ुशी के लिए जीना सबके बस की बात नहीं,
अपने ग़मों के ऊपर दूसरे की ख़ुशी को तवजू देनी होती है,
कई बार खुद को भुला दूसरे के चेहरे की मुस्कराहट बननी पड़ती है ।

दिल से निकली ख़ुशी रोम रोम को प्रोत्साहित है कर जाती,
तकलऊफ चाहे जितनी हो पर अंत में ख़ुशी है दे जाती,
आप की पहचान अगर किसी और के चेहरे की मुस्कराहट हो,
तो सोचो ज़माने में ज़माने का इससे बड़ा तोहफा और क्या हो ।

दिल को समझ उसके हर धड़कन पे अपना वजूद चाहते हैं,
ग़मों में झोंकर खुद को भी उसके लिए हर ख़ुशी लाना चाहते हैं,
जो मुक्कद्दर ने छीना उससे वो सब भुला नए लम्हे देना चाहते हैं,
और निस्वार्थ भाव से उनके जीवन में जीने की नए वजह लाना चाहते हैं ।


Sunday, 3 April 2016

Anokha Milan

कैसे भुला दू वो लम्हा जो मुझे कर गया कुछ ऊँ प्रभावित,
दीदार उसका सोचने पर मजबूर कर गया की मैं मृत हू या जीवित,
चेहरा उसका मानो खूबसूरती का मज़ार,
और साफ़ दिल दे रहा मानो अपनेपन की गुहार ।

शांत स्वाभाव सवेंदनशील उसके विचार,
दिलों को जो छू जाएँ कुछ ऐसे उसके संचार,
क्या रिश्ता है मेरा उससे जो मैं आज उसके बारे में लिख रहा,
दुनिया में करोड़ों को छोड़ उसकी कशिश में मस्त मगन हो रहा ।

वो बोली न मुझसे कुछ भी, कह कर की आप खुद ही समझ लें,
मैं कोई बड़ी सख्सियत नहीं तो आप मुझे भला क्योँ समझ लें,
ये बात उसकी कर गयी मुझे कुछ उसका दीवाना,
है वो अत्यन्त खुश या अत्यन्त दुखी इस बात का था मुझे पता लगाना ।

वो रही सबसे अकेली और दूर सी दिखी मुझे भीड़ से,
चुपचाप गुमसुम सी रही कुछ सोचती, जैसे हांथी बंधा हो जंजीर से,
उसको समझ मुझे उसकी ताकत को बढ़ाना है,
दिल में उतर उसके उसकी सख्सियत को समझ जाना है ।

नहीं कुछ नामुमकिन अगर हौसलें और इरादे नेक हों,
यहाँ तो बस दिल को समजहना है भले हारने के लम्हे अनेक हों,
पर किसी दिल को उन्ही अकेला मई छोड़ का जा नहीं सकता,
और जब दिल हो इतना प्यारा तो उसे अकेला नहीं छोड़ सकता ।

अरमानों के आरजू को देते हुए पंख,
कोशिश जरी है ताकि भर सकुिं उस खास के जीवन में खुशियों के रंग,
जीवन जी क्रूरताओं को मिटा कुछ बदल दू  उसे कुछ इस कदर,
दुनिया के सामने रहे भले चुप, पर कम से कम हमारे सामने तो मचाए ग़दर

Saturday, 23 January 2016

Repurchase Agreement - REPO

Investment Banking थोड़ा मुश्किल तो थोड़ा आसान है,
Money Market और Capital Market में Financial Instrument "REPO" का बड़ा नाम है,
Repurchase Agreement सही मायनो में दो दलों के बीच एक संधि है,
जिसमे Buyer की Seller से और Seller की Buyer से जुगलबंदी है ।

Repo Seller Collateral को Repo Buyer को है बेचकर आता,
जिसके बदले में वो Repo Buyer से Cash है पाता,
इस Cash की कीमत Collateral के Market Value से मेल है खाती,
Maturity पे Repo Buyer से ये Collateral वापस है ली जाती ।

Repo Seller Cash के साथ, Collateral का Interest भी चुकाता है,
यही अतिरिक्त Interest Maturity पे Repo Buyer के चेहरे पे मुस्कराहट लाता है,
ये Interest  जिस Rate पे है निकलता वही Repo Rate है कहलाता,
और ये पूरा Repo Trade आम तौर पे Short Term है खेला जाता ।

Market Risk और Credit Risk पुरे Transaction के अंतराल Repo Seller के साथ रहता है विद्यमान,
Repo Seller जहाँ खुद को Repo तो Repo Buyer खुद को Reverse Repo का देता है नाम,
सवाल फिर ये उठा की Repo Trade की जरुरत आखिर क्योँ है पड़ती,
Collateral देकर Cash लेना और Maturity पे Interest के साथ देना,
क्या ये Traders की मजबूरी है बयां करती,
पर देखा है मैंने अमीर  Traders को खेलते और इसी लिए मुझे ये बात नहीं समझती ।

Selling Short की संज्ञा Traders से वो Securities है बिकवाती जो उनकी है ही नहीं,
Repo Desk वो Security खरीद Reverse Repo है कर जाती,
Primary और Secondary Markets इन Securities को है प्रदान करती,
Maturity अवधि के अनुसार इन्हे Treasury Bill, Treasury Notes और Treasury Bonds की संज्ञा है मिलती ।

Repo Trading की समझ वित्तीय सब्दावली का संग्रह है,
Rate जिसपे हुआ Repo वो Repo Rate, और जिसपे हुआ Reverse Repo वो Reverse Repo Rate है,
Rate जो थोपे Margin Seller के Collateral पे वो Haircut है कहलाता,
Collateral के Price से जुड़े Risk को कम करने के लिए है ये Haircut है लगाया जाता ।

Bank ने जो Percentage दिया RBI को वो Cash Reserve Ratio कहलाया,
बिचारा Bank जिसने CRR पे कुछ भी नहीं कमाया,
Bank ने जो Percentage रखा खुद के पास हमेशा, वो Statutory Liquidity Ratio कहलाया,
इसको Banks ने Gold या Government Securities के रूप में रखा,
और दबा कर इस्पे Interest भी कमाया ।

Saturday, 21 November 2015

Ashrun Ke Ashrun

अश्रु अकसर यूँही मुझ से कुछ बातें कर लेते हैं,
मेरे समक्ष कुछ वो भी बिचारे कुछ रो लेते हैं,
कौन कहता है अश्रु किसी के रोने की प्रतिक्रिया है,
वो तो दिल के भाव हैं जो आँखों से अक्सर निकला करते हैं !

अश्रु आँखों को साफ़ कर दिल को हल्का हैं कर जाते,
वरना सोचिये अगर ये ना निकले तो अंदर ही अंदर हम सब घुट जाते,
मुस्कराहट और रोना तो दो पहलूँ है भावों के,
वरना कोई रो या मुस्कुरा रहा ये हम कैसे समझ पाते !

लकिन अश्रु ही क्योँ बना रोने का प्रतिक,
दिल का दर्द क्योँ बना आँखों के जरिये बहने का रीत,
अश्रु सिर्फ दिल को सहानुभूति नहीं देते ,
उस बुरे समय को जिन आँखों ने है देखा उन्हें भी हैं धो देते !

अश्रु स्वार्थ रहित लगा रहता है इंसान को मजबूत बनाने में,
किसी ने सोचा की क्या होता होगा जब टूट जाते होंगे खुद ये अश्रु इंसान को मानाने में,
अश्रू के अश्रु को कौन पोछता होगा,
 या ये अश्रु कभी भी रोता नहीं होगा !

इस प्रकृति में जो भी है सब काल चक्र के अधीन है,
तो ये अश्रु ना रोये ये नियमों के विपरीत है,जिन
जिन अश्रूयों ने हमारे दर्द को मिटाया है आजतक,
आओ उनकी मुस्कराहट के लिए कुछ करें अन्नंत काल तक !

इंसानियत को मरता देख रो रहे हैं ये अश्रु,
अराजकता को पनपता देख रो रहें हैं ये अश्रु,
अत्याचार को बढ़ता देख रो रहें हैं ये अश्रु,
प्रेम को स्वार्थी होता देख रो रहें हैं ये अश्रु !

हमे आज इन अश्रूयों का कर्ज चुकाना है,
जिन अश्रूयों ने दिया निस्वार्थ हमारा दुःख में साथ उनके लिए कुछ कर जाना है,
क्या हम अराजकता और अत्याचार को मिटा इंसानियत  परिपक्व नहीं कर सकते,
आज के इस मतलबी संसार में भी क्या हम निस्वार्थ एक दूसरे   से प्यार नहीं कर सकते !



Saturday, 26 September 2015

Dosti - Ek Anokha Rishta

कसमों कस में थी ज़िन्दगी तो सोचा रब से फ़रियाद करूँ,
कोई ना था साथ तो सोचा किस को याद करूँ,
रब ने सुनी हमारी भी भले कुछ इंतेज़ार के बाद ही सही,
मिलाया एक अनोखे दोस्त से हमे जिसकी दोस्ती लगी हमे बहुत सही ।

दोस्ती की परिभाषा दोस्ती करने के बाद ही समझ है आती,
दोस्त हो खास तो ज़िन्दगी बदल है जाती,
दोस्ती का तोहफा हर किसी को नहीं नवाजते खुदा,
ये तो कर्मों के फलस्वरूप मिलाते हैं या करते है जुदा ।

अंजुमन-ए-महफ़िल में किसी अपने का साथ कुछ खास पल बनाता है,
कोई मिल जाये समझने वाला तो सुनहरे साथ को साक्षत्कार कराता है,
इस मायावी दुनिया में जहाँ अपने साथ छोड़ जाते हैं,
वही ये मिले अपने दोस्त ही हैं जो काम आते हैं ।

दोस्त में कभी दिखे खुदा तो कभी दीखता रब है,
दोस्त मिल जाये जहाँ वही बनता स्वर्ग है,
दोस्त के समक्ष दिल खोल देने में ही जीवन का सार है,
दोस्त ना हो तो जीवन बर्बाद है।

कोई पल नहीं होता जब दोस्त से आपका संगम निर्धारित हो,
वो पल बड़ा खास होता है जब दोस्त से आपका मिलन निर्धारित हो,
दोस्त आपपे जान छिड़के इससे बड़ी कोई सम्पति नहीं,
आप दोस्त के लिए कुछ कर गुजरे इससे बड़ी कोई भक्ति नहीं ।

दोस्ती को हमने जीवन की उन्मुक्त परिकाष्ठा माना है,
दोस्त के संग बीते जीवन इसी सिद्धांत को सबसे उतकृष्ट माना है,
दोस्ती की परिभाषा दोस्ती के अज़ीज रिश्ते को निभा कर ही है समझी जा सकती,
कितना ही बुरा हो समय दोस्त के संग दोस्ती निभा ज़िन्दगी को बेहतर है बनाई जा सकती 

Sunday, 15 February 2015

Dard-e-February

ज़िन्दगी ने कैसे आलम में फसाया मुझको,
जिससे की सबसे ज्यादा मोहब्बत उसी ने दिया धोखा मुझको,
मोहब्बत की अंजुमन में विश्वासघात कहाँ पनाह पाती है,
उसको किसने दिया हक़ जो वो दिल के साथ खिलवाड़ कर जाती है । 

दिल को रोता छोड़ उसकी मुस्कराहट के लिए मैं चल निकला,
उसकी मोहब्बत थी ऐशो-आराम, दौलत और शौहरत, तो उसे उन्ही  छोड़ निकला,
आज़ आया उसका जन्मदिन तो दिल मेरा खून के अश्रु बैठा,
बोल नहीं पा रहा उससे पर दिल मेरा एक बार फिर उससे मोहब्बत कर बैठा । 

उसने भुलाया मुझे अपने ऐशो-आराम के लिए,
तोड़ दिए सारे वादे उसने अपनी ज़िन्दगी को सवारने के लिए,
अंतिम सांस तक दूंगी तेरा साथ ये कह तो गयी थी वो,
फिर मेरे अंतिम सांस लेने का वक़्त धोके से दे गयी वो । 

उसने भुलाया मुझे और अपनी ज़िन्दगी में मसगूल हुई,
आज आया उसका जन्मदिन तो दिल-ऐ हलचल और सुरूर हुई,
वो तो अपने स्वार्थ में  मेरा जन्मदिन भी भुला बैठी,
मोहब्बत  का मजाक बना मुझे वो रुला बैठी । 

उसे किया था वादा की उसकी उमंगो और तर्रक्की के बीच कभी नहीं आऊंगा,
जब तक जरुरत न पड़े उसे मेरी उसको अपना चेहरा कभी न दिखाऊंगा,
लेकिन आज उसके जन्मदिन पे उसे सुभकामनाएँ दू तो दू कैसे,
उसके धोके के लिए कौन सा तौफ़ा दूं तो दूं कैसे । 

अपनी नम आँखों और रोती कलम से उसको जन्मदिन की बधाई देता हूँ ,
फ़रबरी में करती है दुनिया जहाँ मोहब्बत, वही मैं अपनी मोहब्बत को याद करता हूँ,
मेरा तो सब कुछ झीन कुछ देने काबिल ना छोड़ा तूने,
पर अपने रोते दिल से भी तेरी खुशियाँ और ख़ुसनसीबी की कामना करता हूँ । 

Sunday, 8 February 2015

Happy Valentines Day 2015

मोहब्बत का मेला देखो फिर झूम के आया है,
ना जाने इस बार कौन सी सौगात लाया है,
हमे तो अपनों के दर्द ने है लूटा,
कैसे मुस्कुराएं जब इतनी गंभीरता से दिल जो है टुटा ।

मोहब्बत पे यकीन बेशुमार लिए घूमते थे,
वो दिन भी था जब हम दिलों में प्यार लिए घूमते थे,
अंजुमन में मरती थी लड़कियां हमसे नैन लड़ाने को,
सबसे नैन चुरा किसी खास के लिए हम अपना दिल धड़कवाते थे ।

ज़िंदगानी से मोहब्बत और मोहब्बत में ज़िंदगानी को तलाशा था हमने,
किसी की बेशुमार मोहब्बत को दिल में बसाना था  अपने,
मोहब्बत की सौगात लिए है हम जन्मे ऐसा माना था हमने,
पर एक पल में दिल तोड़ सब झुटला दिया उन्होंने  ।

किसी को चाहने की इतनी बड़ी सजा एख्तियार हुई,
दिल से निकलेंगे अश्रु ऐसी सजा की फरमान-आत हुई,
हमारी गलती बस उनसे सच्ची मोहब्बत करने की करार हुई,
हम आज भी दिल से रोते हुए मुस्कुराते है, और वो दिल से खिलवाड़ कर फरार हुई ।

अपनी मोहब्बत के बदले हमने बस प्यार ही तो माँगा था,
और ज़िन्दगी भर देंगे एक-दूजे का साथ यही तो हमारा एक-दूसरे से वादा था,
पर धोका देना कैसे फिदरत में आता है आशिक़ों के,
क्या वाकई तररकी, पैसा, रुतबा और ऐशो-आराम की कीमत प्यार से ज्यादा था ।

ये १४  फेब्रुअरी अक्सर मेरे दिल को रुलाती है,
जहाँ मिलते है इस दिन लाखों दिल, वही उसके धोके की याद दिलाती है,
पर अगर भुला दिया मैंने उसे तो उसमे मुझमे क्या फर्क रह जायेगा,
और अगर अपने मतलब  सिर्फ याद किया उसे तो प्यार अपनी सच्चाई बयां कैसे कर पायेगा ।

इस मोहब्बत दिवस पे तुझसे एक वादा करता हूं,
तू छोड़ गयी भले मुझे पर ज़िन्दगी भर तुझसे बेइन्तेआह मोहब्बत का वादा करता हूँ,
तेरा प्यार कच्चा था जो इस मायावी चीजों के मोह में मेरा प्यार तुझसे भुला बैठा,
मेरा प्यार सच्चा है सायद इसीलिए तेरे जाने के बाद भी तुझसे प्यार कर दिखा बैठा ।

मोहब्बत कोई मजाक नहीं जो तू मेरे दिल से खेल मजा ले बैठी,
मोहब्बत वो अश्क है जो मुर्दे में भी जान है फूक बैठती,
तेरे धोके को मैं अपने बेइन्तेआह मोहब्बत से भुलाऊँगा,
नसीबवालों को मिलती है मोहब्बत ये तेरे धोके से मोहब्बत कर मैं तुझे बतलाऊंगा । 

Saturday, 3 January 2015

Mohabbat Ka Dard

वो अंजुमन में  हमारी आये कुछ इस कदर,
ज़िन्दगी में उन्होंने हमारे मचा दिया कुछ ऐसा ग़दर,
मोहब्बत की हमसे बस अपने शौक के लिए,
दिल तो तोडा हमारा और हमने पूछा तो मुह मोड़ लिए ।

हम नादान उन्हें अपनी जिंदगी  समझ बैठे थे,
उनके साथ जीवन भर के सपने बुने बैठे थे,
वो हमारे प्यार का मजाक बनाते चले गए इस कदर,
 एक पल भी न सोचा की कैसे जिएंगे हम उनके बगर ।

उनकी मुस्कराहट के लिए हम अपने आंसू भी छुपा बैठे,
वो शौकिया धोखा दे हमे रुला बैठे,
आगाज -ऐ  मोहब्बत पे हमारा विश्स्वास अटल था,
कम्भख्त वो हमारे  मोहब्बत पर विश्वास को ही हिला बैठे ।

आज उनकी ख़ुशी के लिए हमने जिन खुशियों को छोड़ा था,
आज वो उन्ही खुशियों के लिए हमे छोड़ चले,
वो अपनी खुशनुमा ज़िन्दगी में जी रहे है मस्त,
हम आज भी  उनकी  यादों  के सहारे हो रहे पस्त ।

वो भी नहीं जानते की मोहब्बत बार बार नहीं होती,
दिल दुखना आसान है पर टूटे दिल के साथ जीना आम बात नहीं होती,
होगा उनका हुनर दिल को तोड़ खुशियां मानाने का,
लेकिन टूटे दिल से भी धोकेबाज को चाहना ही सच्चे आशिक़ की पहचान है होती ।

दिल से लिए फैसले अक्सर दर्द देते है,
अमीरों की महफ़िल में अक्सर दिलों के खरीद-फरोक होते हैं,
हमे  भी बताना क्या पाया तूने अमीरों की महफ़िल में जाकर,
और हो सके तो समझना हमे भी कभी एक सच्चा आशिक़ बनकर । 

Wednesday, 31 December 2014

Happy New Year 2015

ज़िन्दगानी से हुई मुलाकात तो खुद को 2014 मे पाया
खुश्नसिबि को जाना तो खुद को 2014 के अंतिम दिन मे पाया
बेखबर आगाजे जिन्दगी को जीता चला जा रहा था
अकेलेपन से लड़ता दोस्तों को खोजते जा रहा था

कई मिले बहूत बिछड़ने के बाद लगी जिन्दगी अधूरी
किसको समझता और किसको समझाता की दोस्तों के बिना जिंदगी है अधूरी
पर सब से तन्हा जिया जा रहा था
आँखे थीं नम बस चला जा रहा था

2014 को अलविदा कहने की घड़ी आई थीं
जिनका दिल तोड़ा उनसे माफ़ी मांगने की घड़ी आई थीं
सब कुछ भुला माफ़ी मै आज माँगता हूं
दोस्तों की तलाश मे चार क़दम और चलता हूँ

2014 ने दिये कै हसीन लम्हे जिनका सुक्रिया मै करता हूं
दिल भी टूटा तो उसे अपनी किस्मत समझता हूँ
आगाजे ज़िंदगी 2015 मे एक नयी सौगात लाये
जो छूट गये पीछे उन्हें  मेरे साथ लाये

मैं बढ़ा चार क़दम तो हिन्दुस्तान भी मेरे संग बड़े
अगर मै बना इन्सान तो इन्सानियत़ भी मेरे साथ बड़े
दोस्ती की एक नयी मिसाल बनु तो दोस्त मेरे साथ बड़े
और आशिक बना मै अगर तो मौहब्बत चारों और दिखे

आओ मिलकर करे आगाज 2015 नवीन वर्ष का
जिसमे सब रहे ख़ुश व्यवहार हो परोपकार का
एक दूसरे को दे सम्मान ऊँचा करे देश का नाम
जानवरों से भरते समाज मे आओ मिलकर पैदा करें इंसान

नवाबों का सौख पाले दूसरों को दे ख़ुशी
मोहब्बत और भाई चारे को फैलायें तकि ख़त्म हो सके खुदकुशी
दिल से दिल के लिये आओ मिलकर बने चेहरे की मुस्कुराहट
2015 के इस पावन अवसर पर लाये हर दिल मे ख़ुशी की आहट

Sunday, 14 December 2014

Engineer's Journey of Life

Padh Liya Science Agar, To Engineer Hi Banna Hai,
Har Umeed Se Bhari Ma-Baap Ki Aankhon Ka Yahi Sapna Hai,
Daswi Ki Board Ki Maar Hai, Bharawahi Me Science Me Admission Ki Katar Hai,
IIT Se Kam Nahi Yahi Sabki Engineer Se Icchaon Ka Sarokaar Hai.

In Sab Ke Beech Engineer Ki Halat Kharaab Hai,
Kesar Aur Chawanprash Se Hoga Kya, Mechanics – Graphics Ki Badi Buri Maar Hai,
Mathematics Ne To Jaan Nikali,
Nastik Me Bhi Aashta Ki Umag Jaga Dali.

Engineer Sudrudh Vicharon Ka Bhandaar Hai,
Mechanical, Electrical, Computer, Elcetronics, Electrical Jaisi,
Branches Ka Pratakshya Sakshatkaar Hai.

Apni Zindagi Ko Samaj Ke Prati Samrpit Kar Jita Hai Wo Shaan Se,
Fauji Ladta Hai Sarhad Pe, Engineer Badhata Desh Ko Vigyan Ke Chamatkaar Se,
Engineer Ki Soch Ki Koi Seema Nirdharit Nahi Hoti,
Isiliye To Badi Badi Companiyan Engineers Ko Hire Karne Se Piche Nahi Hoti.

IT Company Ne To Engineers Ko Ek Naya Samaan Dilaya,
Jo Join Hua To Kahlaya Engineer,
Bada Hua To Kahlaya Senior Engineer,
Lead Bhi Bana To Kahlaya Lead Engineer.

Aaj Bhi Engineer Dopahar Me Breakfast Karta Hai
Raat Mey Lunch Karta Hai
Aawa Jaahi Ke Waqt Soya Karta Hai
Sari Vipadaon Ke Bawjood Time Pe Project Delivery Karta Hai.

Aao Mil Kar Hum Kare Samman Us Engineer Ka,
Jisne Project Delivery ke Liye Apni Wife Ki Delivery Ko Bhula Diya,
Khud Ki Family Ko Chod Kar Apni Project Team Ko Hi Apni Family Bana Liya,
Apni Khusiyon Ko Tyag Kar Project Ko Delivery Excellence Award Aur Company Ko CMMI Level Dila Diya.

MODBUS Protocol

जब नही चल पा रहा था Serial Communication पे किसी का बस,
तब Schneider Electricले आया अनोखा Protocolजो कहलाया MODBUS,
MODBUS ने जहाँ De Facto Communication Protocol कि छाप है छोड़ा,
वहीं अनेकों  Industrial Electronic Devices को आपस में है जोड़ा |


MODBUS SCADA Network मेंSupervisory Computer को RTU से है जोड़ता,
एक Device बनता MODBUS Master तो दूसरा MODBUS Slave बन आपस में है खेलता,
Master का ResponseFunction Code के जरिये है समझा जाता,
अगर Requested Function Codeवापस  आए तो ही Response को Normal है समझा जाता |


Serial Line Communication के  लिए MODBUS PDU का Size आया 253 Bytes,
256 Bytes में से Server Address ने लिया 1 Byteतो CRC ने निकाला 2 Bytes,
MODBUS Addresses और Data के लिएBig Endian प्रस्तुति है अपनाता,
16-Bit Register के लिए अगर Value है 0X1234तो पहले 0X12 Byte फिर 0X34 Byte को है भेजा जाता |


Serial Transmission Mode में MODBUS RTU और MODBUS TCP कि बहुत माँग है,
RTU और TCP Mode में Addressing ही MODBUS कि जान है,
RTU में जहाँ Start Bit, Slave Address, Function Code, Data, CRC, End Bit  - Addressing को है सजाते,
TCP में  वहीं Transaction Identifier, Protocol Identifier, Length Field, Unit Identifier, Function Code, Data - Addressing में है धूम मचाते |


MODBUS DATA Model को हैं चार विभागो में बाँटा जाता,
Discrete Input, Coils, Input Register और Holding Register ही MODBUS Data Model को है बनाता,
Master के  Request को SlaveSlave Address के जरिये है अपनाते,
Function Code किस Register में है लिखनाया किस Register से है पढ़नाइस तकनीक को है  समझाते |


MODBUS RTU  जहाँ 247 Devices को ही एक Data Link Network पे है आने कि जहाँ मंजूरी देता,
वहीं MODBUS TCP इस बंधन को है बेह्रह्मि से तोड़ता,
MODBUS Organization, Inc. पे MODBUS के Promotion और Development का दारोमदार है,
आज भी MODBUS RTUMODBUS ASCII और MODBUS TCPSerial Communication कि जान है |

FDT DTM Technology

Field Device Technology (FDT) वो अंतरप्रुश्त है,
जिसमे Field Devices और Automation Plants के बीच Open Data Exchange का समावेश है,
जिन विवरण को IEC 62453 और ISA103 का अन्तर-राष्ट्रीय सम्मान है,
इसमे Device Type Manager (DTM) और FDT Frame Application  (FA) का अनोखा संगम है |

FDT Group कि सोच FDT Standard के रुप में प्रतक्श्यता लाई,
FDT 1.x Specifications के बाद,
FDT2 Specifications और सुदृढ़ बन आई,
FDT 1.x जहां  Microsoft COM और Active X को सम|ये थे,
FDT2 वही Microsoft .NET, WPF/Winforms कि खूबसूरती अपने संग लाए थे |

FDT वो समान स्तर है जहाँ सभी DTMs एक दुसरे से गुफ्त--गु है कर सकते,
Manufacturers, Hierarchy के परेसभी DTMs है FDT Ko सलाम करते,
Offline Engineering, Network Scan, User Management, Topology Import/Exportजहाँ FDT कि पहचान है,
वही Audit Trail, Data Storage, Documentation और Diagnostics बढ़ाते FDT कि शान है |

FA Device Instance और Data को है संयोजित रखता,
विभिन्न Communication Protocol के साथ Single/Multi Workstation वातावरण हैं प्रस्तुत करता,
Device और Communication Component कि कार्यप्रणाली को User Interface के संग संभली DTM बैठा है,
अपनी कार्यप्रणाली कि सफलता के लिए Frame Application कि गोद में DTM खेलता है |

Device, Communication, Gateway, DTMs के प्रकार है,
Frame Application से Device और Protocol Functions कि बातें करवाना का | है,
Frame Application और DTM BL का वार्तालाप Defined Interfaces के द्वारा है अंजाम दिया जाता,
DTM BL में अहम् Protocol और Device Functions कइ विद्वता को पनाह है,
Device Connection, Message Sending, Plant Scanning को संभलने वाला Communication Channel महान है |

Observer, Expert और Engineer, User Management के संभाग हैं,
Engineer जहाँ सर्वोच वही Observer को सुरुवति प्राप्त है,
Planning, project Engineering, Commisioning, Operation सभी चरणों में FDT कि भूमिका विद्यमान है,
Interoperability को पहचान बनायेअलग-अलग DTMs बाँटे आपस मए ज्ञान हैं   |||

Happy Diwali 2019

दिपक की जगमगाहट आपके पुरे आँगन को उज्जियाये, रोशन करे ज़िंदगानी और खुशनुमा सा बनाये, क्योँकि ये पर्व कोई मामूली पर्व नहीं, है पर्व पुरुषार...