Sunday, 15 February 2015

Dard-e-February

ज़िन्दगी ने कैसे आलम में फसाया मुझको,
जिससे की सबसे ज्यादा मोहब्बत उसी ने दिया धोखा मुझको,
मोहब्बत की अंजुमन में विश्वासघात कहाँ पनाह पाती है,
उसको किसने दिया हक़ जो वो दिल के साथ खिलवाड़ कर जाती है । 

दिल को रोता छोड़ उसकी मुस्कराहट के लिए मैं चल निकला,
उसकी मोहब्बत थी ऐशो-आराम, दौलत और शौहरत, तो उसे उन्ही  छोड़ निकला,
आज़ आया उसका जन्मदिन तो दिल मेरा खून के अश्रु बैठा,
बोल नहीं पा रहा उससे पर दिल मेरा एक बार फिर उससे मोहब्बत कर बैठा । 

उसने भुलाया मुझे अपने ऐशो-आराम के लिए,
तोड़ दिए सारे वादे उसने अपनी ज़िन्दगी को सवारने के लिए,
अंतिम सांस तक दूंगी तेरा साथ ये कह तो गयी थी वो,
फिर मेरे अंतिम सांस लेने का वक़्त धोके से दे गयी वो । 

उसने भुलाया मुझे और अपनी ज़िन्दगी में मसगूल हुई,
आज आया उसका जन्मदिन तो दिल-ऐ हलचल और सुरूर हुई,
वो तो अपने स्वार्थ में  मेरा जन्मदिन भी भुला बैठी,
मोहब्बत  का मजाक बना मुझे वो रुला बैठी । 

उसे किया था वादा की उसकी उमंगो और तर्रक्की के बीच कभी नहीं आऊंगा,
जब तक जरुरत न पड़े उसे मेरी उसको अपना चेहरा कभी न दिखाऊंगा,
लेकिन आज उसके जन्मदिन पे उसे सुभकामनाएँ दू तो दू कैसे,
उसके धोके के लिए कौन सा तौफ़ा दूं तो दूं कैसे । 

अपनी नम आँखों और रोती कलम से उसको जन्मदिन की बधाई देता हूँ ,
फ़रबरी में करती है दुनिया जहाँ मोहब्बत, वही मैं अपनी मोहब्बत को याद करता हूँ,
मेरा तो सब कुछ झीन कुछ देने काबिल ना छोड़ा तूने,
पर अपने रोते दिल से भी तेरी खुशियाँ और ख़ुसनसीबी की कामना करता हूँ । 

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