Wednesday, 31 December 2014

Happy New Year 2015

ज़िन्दगानी से हुई मुलाकात तो खुद को 2014 मे पाया
खुश्नसिबि को जाना तो खुद को 2014 के अंतिम दिन मे पाया
बेखबर आगाजे जिन्दगी को जीता चला जा रहा था
अकेलेपन से लड़ता दोस्तों को खोजते जा रहा था

कई मिले बहूत बिछड़ने के बाद लगी जिन्दगी अधूरी
किसको समझता और किसको समझाता की दोस्तों के बिना जिंदगी है अधूरी
पर सब से तन्हा जिया जा रहा था
आँखे थीं नम बस चला जा रहा था

2014 को अलविदा कहने की घड़ी आई थीं
जिनका दिल तोड़ा उनसे माफ़ी मांगने की घड़ी आई थीं
सब कुछ भुला माफ़ी मै आज माँगता हूं
दोस्तों की तलाश मे चार क़दम और चलता हूँ

2014 ने दिये कै हसीन लम्हे जिनका सुक्रिया मै करता हूं
दिल भी टूटा तो उसे अपनी किस्मत समझता हूँ
आगाजे ज़िंदगी 2015 मे एक नयी सौगात लाये
जो छूट गये पीछे उन्हें  मेरे साथ लाये

मैं बढ़ा चार क़दम तो हिन्दुस्तान भी मेरे संग बड़े
अगर मै बना इन्सान तो इन्सानियत़ भी मेरे साथ बड़े
दोस्ती की एक नयी मिसाल बनु तो दोस्त मेरे साथ बड़े
और आशिक बना मै अगर तो मौहब्बत चारों और दिखे

आओ मिलकर करे आगाज 2015 नवीन वर्ष का
जिसमे सब रहे ख़ुश व्यवहार हो परोपकार का
एक दूसरे को दे सम्मान ऊँचा करे देश का नाम
जानवरों से भरते समाज मे आओ मिलकर पैदा करें इंसान

नवाबों का सौख पाले दूसरों को दे ख़ुशी
मोहब्बत और भाई चारे को फैलायें तकि ख़त्म हो सके खुदकुशी
दिल से दिल के लिये आओ मिलकर बने चेहरे की मुस्कुराहट
2015 के इस पावन अवसर पर लाये हर दिल मे ख़ुशी की आहट

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