ये अप्रैल का महीना दिलों को जंझोड़ देता है,
कई दिलों को करता है खुश तो कई दिलो तोङ देता है,
यू तो हर कोइ कर रहा है अपने दिल से काम,
दिन को चैन नहीं और ना रातोँ को आराम।
ये अप्रैज़ल भी माशुका कि भुमीका निभाता है,
इसे पटाने लिये इसकी सहेली "मैनेजर" को पटाना पड़ जाता है,
मैनेजर के खुश हुए बिना ये आशिक़ी अपने अंजाम पे नहीं होती,
और काम जितना भी करलो अगर मैनेजर खुश नहीं तो हर किसी कि किस्मत है रोति।
साल भर कि कड़ी मेहनत इसी अप्रैल के महिने मे रँग लाती,
किसी को रंक से राजा है बनातीं तो किसि का राजपॉट है छिन के जातीं,
अप्रैज़ल कि मोहब्बत हर एम्प्लोयी आपने दिल मे रखता है,
और इसी प्यार मे साल भर अपने बॉस कि यातना संहता है।
पर मोहब्बत मे अक्सर माशुका का प्यार नहीं मिला करता,
लेकिन हर आशिक़ देवदास भी नहीं बना करता,
कर्मों को जो देते है अपने जीवन मे प्राथमिकता,
उन्हें इस अप्रैज़ल से ना मिलन का दर्द भी तोड़ नहीं पाता।
आओ अपने कर्मों को हम अपना गौरव बनाये,
कर्म करें और किसी सामने अपना मस्तिक्ष न झुकाएं,
अपने कर्मों कि परिकाष्ठा को ऎसी उड़ान दें,
की हर मैनेजर खुद हुमैरा संगम हमारी पयारे अप्रैज़ल से करवाऐ।
कई दिलों को करता है खुश तो कई दिलो तोङ देता है,
यू तो हर कोइ कर रहा है अपने दिल से काम,
दिन को चैन नहीं और ना रातोँ को आराम।
ये अप्रैज़ल भी माशुका कि भुमीका निभाता है,
इसे पटाने लिये इसकी सहेली "मैनेजर" को पटाना पड़ जाता है,
मैनेजर के खुश हुए बिना ये आशिक़ी अपने अंजाम पे नहीं होती,
और काम जितना भी करलो अगर मैनेजर खुश नहीं तो हर किसी कि किस्मत है रोति।
साल भर कि कड़ी मेहनत इसी अप्रैल के महिने मे रँग लाती,
किसी को रंक से राजा है बनातीं तो किसि का राजपॉट है छिन के जातीं,
अप्रैज़ल कि मोहब्बत हर एम्प्लोयी आपने दिल मे रखता है,
और इसी प्यार मे साल भर अपने बॉस कि यातना संहता है।
पर मोहब्बत मे अक्सर माशुका का प्यार नहीं मिला करता,
लेकिन हर आशिक़ देवदास भी नहीं बना करता,
कर्मों को जो देते है अपने जीवन मे प्राथमिकता,
उन्हें इस अप्रैज़ल से ना मिलन का दर्द भी तोड़ नहीं पाता।
आओ अपने कर्मों को हम अपना गौरव बनाये,
कर्म करें और किसी सामने अपना मस्तिक्ष न झुकाएं,
अपने कर्मों कि परिकाष्ठा को ऎसी उड़ान दें,
की हर मैनेजर खुद हुमैरा संगम हमारी पयारे अप्रैज़ल से करवाऐ।
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