जीवन की दौड़ में दौड़ना है जरुरी,
हार से लगता है डर ना हो ऐसी कोई मज़बूरी,
जीवन जीने के सलीके बनाते इंसान को मजबूत हैं,
और अगर आ गया मन में हार का डर, तो हालात डराते खूब हैं।
चलना और गिरना प्रकृति का नियम है,
उत्थान और पतन सिखाता इंसान को सयम है,
गिर के उठ खड़ा जब हो जाता है इंसान,
तब अपने कर्मों से बन जाता है महान।
बाल अवस्था में जब नहीं तकराय गिर के उठने से,
तो आज गिरने के डर से चलना क्योँ छोड़ दिया,
जब छूना था मुकाम बुलंदी का,
तो सिर्फ हार के डर से कर्म करना क्योँ छोड़ दिया।
ये हार ही है जो हमें सिखाती है,
जीवन जीने के नजरिये में परिपक्वता लाती है,
इंसान हर सिख माँ के पेट से सिख नहीं आ सकता,
और अपनी हार का जिम्मा अपनी किस्मत पे नहीं डाल सकता।
संभल कर चलना बुद्धिमानी कहलाती है,
पर गिर के उठना दिलेरी दिखलाती है,
चलो हुंकार भर के ताकि गिराने वाले पलों को भी तुम्हारा खौफ हो,
और रखना दिल मजबूत ताकि गिर के उठने के बाद भी तुम्हारा रौब हो।
हार से लगता है डर ना हो ऐसी कोई मज़बूरी,
जीवन जीने के सलीके बनाते इंसान को मजबूत हैं,
और अगर आ गया मन में हार का डर, तो हालात डराते खूब हैं।
चलना और गिरना प्रकृति का नियम है,
उत्थान और पतन सिखाता इंसान को सयम है,
गिर के उठ खड़ा जब हो जाता है इंसान,
तब अपने कर्मों से बन जाता है महान।
बाल अवस्था में जब नहीं तकराय गिर के उठने से,
तो आज गिरने के डर से चलना क्योँ छोड़ दिया,
जब छूना था मुकाम बुलंदी का,
तो सिर्फ हार के डर से कर्म करना क्योँ छोड़ दिया।
ये हार ही है जो हमें सिखाती है,
जीवन जीने के नजरिये में परिपक्वता लाती है,
इंसान हर सिख माँ के पेट से सिख नहीं आ सकता,
और अपनी हार का जिम्मा अपनी किस्मत पे नहीं डाल सकता।
संभल कर चलना बुद्धिमानी कहलाती है,
पर गिर के उठना दिलेरी दिखलाती है,
चलो हुंकार भर के ताकि गिराने वाले पलों को भी तुम्हारा खौफ हो,
और रखना दिल मजबूत ताकि गिर के उठने के बाद भी तुम्हारा रौब हो।
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