Sunday, 11 June 2017

Kuch Bhulne Kuch Bhulane Ki Khushi

कशिश थी ज़माने की दूरिऑन मुझे हिरासत में मिली,
सोचा बहुत की क्या थी गलती जो तन्हाईयाँ मुझे ही मिली,
कई बार किसी की इन्तेहाँ चाहत दूरियां बढ़ा जाती हैं,
कोशिश थी मिलन की मगर ये किस्मत दूरियां दे जाती हैं |


गम इस बात का नहीं की तन्हाई को मैंने है महसूस किया,
मोहब्बत ही की इतनी की हर पल उसे याद किया,
जरुरत उसकी भी ना पड़ी क्योँकि मोहब्बत मेरी निस्वार्थ थी,
जब तक थी उसकी ख़ुशी तब तक ही वो मेरे साथ थी |


पलों को जीने की वकालत तो सभी किया करते हैं,
हर पल लेता है अपना इन्तेहाँ ये कोई भी नहीं कहते हैं,
दिल हो साफ़ और नियत में अगर झलक जाये दीवानगी,
तो ऐसी कोई मंजिल नहीं जो हो न सके हासिल कभी |


खुद की तन्हाई से लड़ के मई हंस तो रहा था,
अपने ग़मों को छुपा के मैं दुनिया को हंसा तो रहा था,
पर वही कम्भख्त पल फिर से इतिहास दोहरा गए,
जो मुझे भुला बैठे थे कम्भख्त उससे वापस भेंट और उसकी याद दिला गए |


दिल को अभी मैंने अपने समझाया ही था,
तमन्ना पाने में अभी देर है ये समझाया ही था,
मगर ये पल का इम्तेहान फिर एक बार इम्तेहान ले गया,
जिसे कर रहा था याद कर भुलाने की कोशिश, उसकी याद फिर से दिला गया |


दुनिया किस मोड़ पे किस से करा जाये मुलाक़ात ये कहना नामुमकिन है,
कभी मिले अनजान तो कभी हमसफ़र मगर सही तरीके से पहचानना मुश्किल है,
क्योँ किसी की याद उसकी मौजूदगी जाता जाती है,
सायद ये उसे पाने की है चाहत जो उसके ठुकरा देने के बाद भी उसकी याद दिला जाती है |


अपनी मंजिल को कभी ना दुनिया के प्रहार से भूलने देना,
अगर ले ये मंजिल परीक्षा तो मुस्कुरा के उसको अपने लड़ने की ताकत की चेतना देना,
कभी भी किसी के चाहने से किसी की हार नहीं होती,
हालातों से अगर खुद मान ली इंसान ने हार तो सब कुछ पा लेने के बाद भी मन की जीत नहीं होती |

Monday, 15 August 2016

Happy Independence Day 2016

देस की स्वतत्रंता को आओ हम अपने उड़ान की परिकाष्ठा बनाये,
जो देख नहीं पाई दुनिया हम से आओ वो आज दुनिया को दिखाएँ,
स्वतत्रंता दिवस के इस पावन दिवस पे आओ अपने विचारों की स्वतत्रंता को सुद्रुढ बनाये,
पुरे विश्व में अपने भारतवर्ष की तररक्की का परचम फैलाएं ।

देश को प्रगति की राह अब हर देशवासी को दिखानी होगी,
अलग अलग हो भले प्रयास पर हर प्रयास को अपनी सम्पूर्णता दिलानी होगी,
हर दिल में बस रहे अपने देश को विश्वप्रियता दिलानी होगी,
मेरा देश से हमारे देश की संज्ञा भारतवर्ष को दिलानी होगी ।

क्योँ न करें आगाज-ए-ऐलान आज ताकि हो सके हर कोने कोने में स्त्री का सम्मान,
क्योँ न ख़त्म करें नफरत ताकि मुश्किल हो पहचानना कौन है हिन्दू और कौन मुसलमान,
क्यों न भ्रस्टाचार को ओढ़ाएं हम ईमानदारी की चादर,
इंसान करे इंसान का सम्मान और छोटे बड़े सबका हो आदर ।

मुक्कमल है ईमान तभी तो हर हिंदुस्तानी रखता है वतन पे ईमान,
देश की हो बात तो हर हिंदुस्तानी रखता है हथेली पे जान,
पर आज देश के लिए मरने से ज्यादा जीने की जरुरत है आन पड़ी,
खड़ा है ससक्त भारत ध्यान रहे दुश्मनो और आतंकवादियों,
तुम्हे हर बार की तरह मुह की है खानी पड़ी ।

आपसी भाईचारे और अपनेपन को तवज्जु और हमे दिलानी होगी,
अपने फायदे से पहले देश को प्राथमिकता हमे अपने दिलों में लानी होगी,
जिस तिरंगे को कफ़न बना गौरवान्वित कर गए वो पवित्र दिलेर,
उन दिलेरों की कुर्बानी को सदा अपने दिलों में सम्मान दिलानी होगी ।

तिरंगे की शान का नशा हर दिल पे छाये रहे,
भारत माँ की रक्षा के लिए जान देने का गुरूर हर दिल में के छाये रहे,
हिंदुस्तान का परचम हर देशवासी ऊन्ही लहराते रहे,
विश्व स्तर पे हिंदुस्तान का नशा हर दिल पे छाये रहे । 

Sunday, 1 May 2016

Majdoor

जो मजूरी के लिए दूर दूर तक भटके वही मजदूर है कहलाता,
जो अपनी मेहनत और लगन से जीवन चलाये वही मजदूर है कहलाता,
जो अपने  सपनों को दिल में संजोए अग्रसर है वही मजदूर है कहलाता,
जो  परिश्रम और करम की मिसाल बना वही मजदूर है कहलाता ।

भरा है ये समाज मजदूरों के वजूद से,
महज स्तर अलग है मजदूरी करने के तरीके से,
हर कोई यहाँ मजदूरी ही तो कर रहा,
गरीब आमिर बनना चाह रहा और आमिर और आमिर बनना चाह रहा ।

हर कोई यहाँ भाग रहा अपने  सपनों को तररकी के साँचे में पिरोने में,
तररकी की ख़ुशी को महसूस कर खुद को सबसे अलग दिखाने में,
हर कोई यहाँ सबसे ऊंचाई की शिखर को पाने के लिए है जी रहा,
अपनों को और खुद को भुला, खुद को झोंके जा रहा ।

देश  की प्रगति भी इन्ही मजदूरों के करम से निर्धारित होगी,
मजदूर का स्तर कोई भी हो पर परिश्रम और लगन अपनी परिकाष्ठा पे होगी,
देश खड़ा है अनगिनत मजदूरों के करम के निर्धारित परिणामों से,
मजदूरों ने भी सींचा है देश को अपनी मेहनत के पसीने से ।

मजदूर की ख़ुशी उसके परिश्रम से निर्धारित है होती,
मजदूर की इज़्ज़त उसके करम से प्रफुल्लित है होती,
मजदूर लगा है खुद के साथ देश को एक स्वाभिमान दिलाने में,
खुदी हो खुदमे तो झुकती है दुनिया ये सारे जहाँ को दिखाने में ।

आओ आज मिलकर हम समाज के शिल्पकारों को करें नमन,
खुद बने मजदूर और सिद्धांतों में हो हमारे परिश्रम और लगन,
देश की प्रगति में एक अनोखी भागीदारी हमारी भी हो,
मजदूरों से म्हणत से खड़े इस देश की प्रज्वलित चर्चा पुरे संसार में हो । 

Dil Le Gayi

समुन्दर को नदियों की संज्ञा चुराते देखा है,
रेगिस्तान को पैरों के निशान को खुद में समाते देखा है,
पर कोई कैसे किसी के दिल को है चुरा सकता,
जीने के लिए जरुरी है दिल, और उसी को खुद से चुराते देखा है । 

उनकी कशिश ने ढाया खुश अजब ही कहर,
हमे उनका बना ले गए दिल हमारा फैलाते हुए मोहब्बत की लहर,
दिल को जीतना किसी का इतना आसान नहीं,
और जीत ले कोई तो समझो उससे जादा तुम्हारे लिए कोई खास नहीं । 

जीवन की डोर बंधी ही है मोहब्बत के संवेदनशील तार से,
जिसे जितना सिचो उतनी मजबूती आती है प्यार से,
खुद और खुदी के लिए हर इंसान यहाँ जीया जा रहा,
अंत में खुद को ही भुला खुद से ही दूर होते जा रहा । 

क्या मायने है जीवन के जीने के ये हम सोच नहीं पाते,
जो अपने है उन्हें हम समझ नहीं पाते,
झोंक देते है खुद को अंजानो को खुश करने की होड़ में,
लापरवाह बनते है उनके लिए जो चूक नहीं रहे हमपे प्यार लुटाने में । 

दिम्माग को दिल से सदा ही उम्दा तववजु दी है ज़माने ने,
दिल में बसे है जो उन्हें भुला लगा है दिमाग तररकी को पाने में,
पर कैसे पहचानू की कौन है जो दिल में वास करती है,
मुझसे मेरा दिल ही चुरा चुकी और मुझे पता भी नहीं लगने देती है । 


दिल लेने वाली सदा निस्वार्थ मोहब्बत की मूरत होगी,
खुद की ख़ुशी को रख परे आपके दिल की खुशी की फ़िक्र में होगी,
आपके लापरवाह रवैये को भी भुला दो दिल नहीं कर रहा एक बार भी उफ़,
वही है मेरे दोस्त तुम्हारी सच्ची मोहब्बत - ये सच है ना समझना इसे कोई ब्लफ । 

Saturday, 30 April 2016

Khubsurat Aankhen

आँखों में मैंने उसकी अपनी छवि को पाया है,
बेचैन हो भले कितनी भी पर अपने लिए उसकी आँखों में नमी को पाया है,
आँखों में मैंने उसकी खुद की मदहोशी को है भापा,
और है उसे है मुझसे मोहब्बत इस बात को है जाना ।

आँखों से बातें करना भी क्या नायाब तरीका है,
जुबान होती है खामोश और सिर्फ आँखों को कहना है,
आँखों से आँखों का मिलन सिर्फ आँख ही है देख पाते,
दिल करता है महसूस और होठ खुद को सिले है पाते ।

आँखों की कशिश मोहब्बत का सच्चा प्रमाण है,
दिमाग सकता है बदल पर आँख तो दिल का आइना है,
आँखों ने देखि जहाँ समाज की क्रूरता है,
बसा ले किसी को एक बार तो फिर दगा नहीं देती ।

आँखों के भवर को कुछ मैंने भी किया है महसूस,
लुटाई उसकी आँखों ने भी क्या खूब मोहब्बत ना बनते हुए कंजूस,
आँखों के प्याले में भी एक अजब सा नशा है,
जब खुली हो तो दिखा और बंद हो तो छिपा कर करती प्यार हैं ।

आँखों के मजधार में फस्ने का मौका नसीब वालों को है मिलता,
जिनसे मिल जाएँ आँखें उनकी आँखों में बस्ने का मौका उन्ही नहीं मिलता,
अगर हो जाये कोई आँखें आपको बसने के लिए तैयार,
झोक देना सारा प्यार उन आँखों में सदा रहने के लिए मेरे यार ।


Friday, 8 April 2016

Dil Se Kaise Karen Baat

इंसान ने मोहब्बत के कई रूप दिखाए हैं,
कहीं दिल्लगी तो कहीं क़ुरबानी के नग्मे सजाए हैं,
फिर इस मोहब्बत के होते क्योँ किसी का दिल है छूट जाता,
भरी महफ़िल में भी अकेलेपन को महसूस करते टूट है जाता ।

सवाल-ए-दिल मेरा कर गया मुझसे एक तूफानी गुफ्तगू,
पूछ गया क्योँ किसी ने ना सोची उस टूटे दिल की आरजू,
आज नाम आँखों से हर टूटे दिल को खुश करने की गुहार है,
आओ मिल करें दिल से दिल की बातें चला कुछ ऐसा बहार है ।

दिल की मलकीयत किसी की गुलाम नहीं होती,
और दिल में जबरदस्ती घुसने की किसी की औकात नहीं होती,
दिल को समझ कर ही उसके लिए जिया है जा सकता,
और जीते हुए उसके लिए ही उसमे अपना वजूद है बनाया जा सकता ।

लकिन ज़िन्दगी जीना कोई मज़ाक नहीं,
किसी और की ख़ुशी के लिए जीना सबके बस की बात नहीं,
अपने ग़मों के ऊपर दूसरे की ख़ुशी को तवजू देनी होती है,
कई बार खुद को भुला दूसरे के चेहरे की मुस्कराहट बननी पड़ती है ।

दिल से निकली ख़ुशी रोम रोम को प्रोत्साहित है कर जाती,
तकलऊफ चाहे जितनी हो पर अंत में ख़ुशी है दे जाती,
आप की पहचान अगर किसी और के चेहरे की मुस्कराहट हो,
तो सोचो ज़माने में ज़माने का इससे बड़ा तोहफा और क्या हो ।

दिल को समझ उसके हर धड़कन पे अपना वजूद चाहते हैं,
ग़मों में झोंकर खुद को भी उसके लिए हर ख़ुशी लाना चाहते हैं,
जो मुक्कद्दर ने छीना उससे वो सब भुला नए लम्हे देना चाहते हैं,
और निस्वार्थ भाव से उनके जीवन में जीने की नए वजह लाना चाहते हैं ।


Sunday, 3 April 2016

Anokha Milan

कैसे भुला दू वो लम्हा जो मुझे कर गया कुछ ऊँ प्रभावित,
दीदार उसका सोचने पर मजबूर कर गया की मैं मृत हू या जीवित,
चेहरा उसका मानो खूबसूरती का मज़ार,
और साफ़ दिल दे रहा मानो अपनेपन की गुहार ।

शांत स्वाभाव सवेंदनशील उसके विचार,
दिलों को जो छू जाएँ कुछ ऐसे उसके संचार,
क्या रिश्ता है मेरा उससे जो मैं आज उसके बारे में लिख रहा,
दुनिया में करोड़ों को छोड़ उसकी कशिश में मस्त मगन हो रहा ।

वो बोली न मुझसे कुछ भी, कह कर की आप खुद ही समझ लें,
मैं कोई बड़ी सख्सियत नहीं तो आप मुझे भला क्योँ समझ लें,
ये बात उसकी कर गयी मुझे कुछ उसका दीवाना,
है वो अत्यन्त खुश या अत्यन्त दुखी इस बात का था मुझे पता लगाना ।

वो रही सबसे अकेली और दूर सी दिखी मुझे भीड़ से,
चुपचाप गुमसुम सी रही कुछ सोचती, जैसे हांथी बंधा हो जंजीर से,
उसको समझ मुझे उसकी ताकत को बढ़ाना है,
दिल में उतर उसके उसकी सख्सियत को समझ जाना है ।

नहीं कुछ नामुमकिन अगर हौसलें और इरादे नेक हों,
यहाँ तो बस दिल को समजहना है भले हारने के लम्हे अनेक हों,
पर किसी दिल को उन्ही अकेला मई छोड़ का जा नहीं सकता,
और जब दिल हो इतना प्यारा तो उसे अकेला नहीं छोड़ सकता ।

अरमानों के आरजू को देते हुए पंख,
कोशिश जरी है ताकि भर सकुिं उस खास के जीवन में खुशियों के रंग,
जीवन जी क्रूरताओं को मिटा कुछ बदल दू  उसे कुछ इस कदर,
दुनिया के सामने रहे भले चुप, पर कम से कम हमारे सामने तो मचाए ग़दर

Happy Diwali 2019

दिपक की जगमगाहट आपके पुरे आँगन को उज्जियाये, रोशन करे ज़िंदगानी और खुशनुमा सा बनाये, क्योँकि ये पर्व कोई मामूली पर्व नहीं, है पर्व पुरुषार...